Vishwakarma Shram Samman Yojana 2026: उत्तर प्रदेश में पारंपरिक हुनर से जुड़े कारीगरों के लिए आजीविका मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी इलाकों में काम करने वाले बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची, राजमिस्त्री और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक योजना के तहत पात्र कारीगरों को कौशल बढ़ाने के लिए 6 दिन की निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद संबंधित काम के अनुसार आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है, जिससे कारीगर अपने काम को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।
₹10,000 तक लाभ की जानकारी
इस योजना को लेकर ₹10,000 तक लाभ की जानकारी काफी खोजी जा रही है। उत्तर प्रदेश के MSME विभाग के पोर्टल पर योजना के अंतर्गत कारीगरों के लिए ₹10,000 से ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता का उल्लेख किया गया है। इसका इस्तेमाल कारोबार शुरू करने या मौजूदा काम को बढ़ाने में किया जा सकता है।
| योजना | Vishwakarma Shram Samman Yojana |
|---|---|
| प्रशिक्षण | 6 दिन निःशुल्क |
| मुख्य लाभ | आधुनिक टूलकिट व वित्तीय सहायता |
| वित्तीय सहायता | ₹10,000 से ₹10 लाख तक |
इन कारीगरों को मिल सकता है लाभ
योजना का दायरा कई पारंपरिक व्यवसायों तक रखा गया है। बढ़ई, दर्जी, टोकरी बनाने वाले, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची और राजमिस्त्री जैसे कामगार इसके पात्र हो सकते हैं। हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को भी योजना में शामिल किया गया है।
एक खास बात यह है कि पात्रता केवल किसी विशेष जाति से जुड़ी होने पर निर्भर नहीं है। अगर कोई व्यक्ति पारंपरिक कारीगरी से जुड़ा है, तो निर्धारित प्रमाण के आधार पर वह भी योजना का लाभ ले सकता है। इससे पीढ़ियों से हुनर के जरिए रोजी-रोटी कमाने वाले परिवारों के लिए अवसर बढ़ते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी शर्तें
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का निवासी होना और कम से कम 18 वर्ष की उम्र पूरी करना जरूरी है। आवेदक का संबंधित पारंपरिक काम से जुड़ा होना भी आवश्यक है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार पिछले दो वर्षों में किसी प्रकार की टूलकिट प्राप्त करने वाले आवेदक को पात्रता में समस्या हो सकती है।
कुछ मामलों में पारंपरिक कारीगरी से जुड़े होने का प्रमाण भी देना पड़ सकता है। इसके लिए ग्राम प्रधान, नगर पंचायत अध्यक्ष या संबंधित नगर निकाय के वार्ड सदस्य से जारी प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई है।
ट्रेनिंग के बाद टूलकिट से बढ़ेगा काम
कारीगरों के लिए सिर्फ प्रशिक्षण ही इस योजना की खासियत नहीं है। प्रशिक्षण के बाद आधुनिक तकनीक से जुड़ी टूलकिट मिलने से रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को बेहतर बनाने का मौका मिलता है। सरकार का उद्देश्य इससे कारीगरों की उत्पादकता और काम की गुणवत्ता में सुधार करना है।
उत्तर प्रदेश के MSME पोर्टल पर योजना के तहत बड़ी संख्या में आवेदन और लाभार्थियों का आंकड़ा भी दर्ज है। वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 के लिए पोर्टल पर 3,00,591 आवेदन और इतने ही लाभार्थियों का आंकड़ा प्रदर्शित किया गया है।
FAQ
Vishwakarma Shram Samman Yojana 2026 में कितने दिन की ट्रेनिंग मिलती है?
पात्र कारीगरों को कौशल बढ़ाने के लिए 6 दिन की निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाती है।
योजना में किन कारीगरों को शामिल किया गया है?
बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची, राजमिस्त्री और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को योजना में शामिल किया गया है।
क्या योजना में वित्तीय सहायता भी मिलती है?
उत्तर प्रदेश MSME विभाग के पोर्टल पर योजना के तहत ₹10,000 से ₹10 लाख तक वित्तीय सहायता का उल्लेख है। सहायता कारोबार शुरू करने या उसे बढ़ाने के लिए हो सकती है।